पवित्रशास्त्र
मुसायाह 3


अध्याय 3

राजा बिन्यामीन अपने संबोधन को जारी रखता है—सर्वशक्तिमान प्रभु मिट्टी के शरीर में मनुष्यों के बीच सेवा करेगा—उसके रोम-रोम से लहू निकलेगा जब वह संसार के पापों के लिए प्रायश्चित करेगा—वही एकमात्र है जिसके नाम से उद्धार मिलता है—प्रायश्चित के द्वारा मनुष्य प्राकृतिक मनुष्य को उतार देता है और संत बन जाता है—दुष्ट का संताप अग्नि और गंधक की झील के समान होगा । लगभग 124 ई.पू.

1 और फिर से मेरे भाइयों, मैं तुम्हारा ध्यान अपनी ओर चाहता हूं, क्योंकि मेरे पास तुम्हें बोलने के लिए और कुछ है; क्योंकि देखो, मैं तुमसे आने वाली घटनाओं के संबंध में कहना चाहता हूं ।

2 और जिन बातों की जानकारी मुझे तुम्हें देनी है उन बातों को परमेश्वर के एक स्वर्गदूत ने मुझे बताया है । और उसने मुझसे कहा: जागो; और मैं जागा और देखो मेरे सामने वह खड़ा था ।

3 और उसने मुझ से कहा: जागो, और उन बातों को सुनो जिन्हें मैं तुम्हें बताऊंगा; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें महान आनंद की बातों को बताने के लिए आया हूं ।

4 क्योंकि प्रभु ने तुम्हारी प्रार्थनाओं को सुना है, और तुम्हारी धार्मिकता पर निर्णय दिया है, और उसने मुझे तुम्हारे पास भेज कर यह घोषणा करने को कहा है कि तुम आनंद मनाओ; और कि तुम अपने लोगों में भी घोषणा कर सकते हो, कि वे भी आनंद से भर जाएं ।

5 क्योंकि देखो, वह समय निकट है, और अधिक दूर नहीं है, कि शक्ति के साथ, सर्वशक्तिमान प्रभु जो राज करता है, जो अनंतकाल से अनंतकाल तक राज करता था, वह स्वर्ग से उतर कर मानव संतान के बीच, और मिट्टी के शरीर में रहेगा, और मनुष्यों के बीच, बड़े बड़े चमत्कार के काम करेगा, जैसा रोगियों को स्वस्थ करना, मृतकों को जीवित करना, लंगड़ों को चलाना, अंधों को दृष्टि देना, और बहरों को सुनने की शक्ति देना और सब प्रकार के रोगों को ठीक करना ।

6 और वह मानव संतान के हृदयों में रहने वाले शैतान या बुरी आत्माओं को निकाल फेंकेगा ।

7 और देखो, वह मृत्यु के अतिरिक्त इतना अधिक प्रलोभन, शारीरिक पीड़ा, उपवास, प्यास, थकान झेलेगा कि जितना कि मनुष्य सहन नहीं कर सकता; क्योंकि देखो, अपने लोगों की दुष्टता और घृणित कार्यों के कारण उसके शरीर के हर एक रोम से लहू बहेगा ।

8 और वह यीशु मसीह, परमेश्वर का पुत्र, स्वर्ग और पृथ्वी का पिता, आरंभ से सभी वस्तुओं का सृष्टिकर्ता कहलाएगा; और उसकी मां मरियम कहलाएगी ।

9 और देखो, वह अपने स्वयं के लोगों के पास आया, ताकि उस पर विश्वास करने से मानव संतान को उद्धार मिल सके; और इतना सब होने पर भी वे उसे एक मनुष्य मानेंगे, और कहा कहेंगे कि उसमें शैतान है, और वे उसको यातनाएं देगें, और क्रूस पर चढ़ा देंगे ।

10 और वह तीसरे दिन मरे हुए में से जी उठेगा; और देखो, वह संसार का न्याय करने के लिए खड़ा होगा; और देखो, यह सब इसलिए किया जाएगा कि ताकि मानव संतान पर धार्मिक न्याय आ सके ।

11 क्योंकि देखो, और उसका लहू उन सब के पापों का भी प्रायश्चित करता है जो आदम के उल्लघंन के द्वारा पतित हुए, जो अपने संबंध में परमेश्वर की इच्छा जाने बिना मर गए, या जिन्होंने अनजाने में पाप किया है ।

12 लेकिन हाय, हाय उस पर जो यह जानता है कि वह परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह कर रहा है ! क्योंकि उद्धार पश्चाताप करने और प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास किये बिना किसी को नहीं मिलता ।

13 और प्रभु परमेश्वर ने सारी मानव संतान के बीच अपने पवित्र भविष्यवक्ताओं को भेज कर इन बातों की घोषणा हर एक जाति, राष्ट्र और भाषा में की है, कि जो कोई यह विश्वास करेगा कि मसीह आएगा, उसी के पापों को क्षमा किया जाएगा, और वह महान आनंद से हर्षित होगा, मानो वह उन के बीच आ ही गया हो ।

14 फिर भी प्रभु परमेश्वर ने देखा कि उसके लोग जिद्दी हैं, और उसने उनके लिए एक व्यवस्था नियुक्त की, यहां तक की मूसा की व्यवस्था ।

15 और अनेक चिन्ह, और आश्चर्य, और प्रकार, और छाया उसने अपने आगमन के संबंध में उन्हें दिखाए; और पवित्र भविष्यवक्ताओं ने भी उनके आगमन के संबंध में बातें उनसे बोली थी; फिर भी उन्होंने अपने हृदयों को कठोर कर लिया; और वह यह नहीं समझे कि मूसा की व्यवस्था बिना उसके लहू के प्रायश्चित के बिना कुछ उपलब्ध नहीं हो सकता है ।

16 और यदि छोटे बच्चों के लिए पाप करना संभव होता तो वे भी बचाए नहीं जा सकते थे; लेकिन मैं तुमसे कहता हूं कि वे आशीषित हैं; क्योंकि देखो, जैसे आदम में, या प्राकृतिक स्वभाव द्वारा, वे पतित होते हैं तो उनके पापों का प्रायश्चित मसीह का लहू करता है ।

17 और फिर भी, मैं तुमसे कहता हूं, कि कोई दूसरा नाम, या रास्ता या माध्यम नहीं है जिसके द्वारा मानव संतान का उद्धार हो सके, सिवाय सर्वशक्तिमान प्रभु मसीह के नाम को छोड़ कर ।

18 क्योंकि देखो, वह न्याय करता है, और उसका न्याय उचित होता है; और वे शिशु नष्ट नहीं होते जो अपनी शैशव अवस्था में ही मर जाते हैं; लेकिन मनुष्य अपनी स्वयं की आत्माओं को नरकदंड पिलाते हैं सिवाय इसके कि वे अपने आपको विनम्र करें और छोटे बच्चों के समान बन जाएं, और विश्वास करें कि उद्धार सर्वशक्तिमान प्रभु मसीह के प्रायश्चिच लहू से मिला था, और मिलता है, और मिलेगा ।

19 क्योंकि प्राकृतिक मनुष्य परमेश्वर का शत्रु है, और आदम के पतन के समय से ही शत्रु था, और हमेशा हमेशा के लिए रहेगा, जब तक वह पवित्र आत्मा के आकर्षणों से आकर्षित नहीं होता, और अपनी स्वाभाविक प्रकृति का त्याग कर प्रभु मसीह के प्रायश्चित द्वारा संत बन कर, और बच्चों की तरह आज्ञाकारी, विनम्र, दीन, सहनशील, प्रेम से परिपूर्ण हो कर उन सारी बातों को जिन्हें प्रभु उनके लाभ के लिए लागू करता है, उसी तरह स्वीकार नहीं करता जैसे एक बच्चा अपने पिता की बातों को स्वीकार करता है ।

20 और इसके अलावा, मैं तुमसे यह भी कहता हूं, कि वह समय आएगा जब कि उद्धारकर्ता का ज्ञान हर एक राष्ट्र, जाति, भाषा, और लोगों में आएगा ।

21 और देखो, जब वह समय आएगा, कोई भी परमेश्वर के सामने निर्दोष नहीं ठहराया जाएगा, सिवाय छोटे बच्चों के, और पश्चाताप करने और सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर के नाम पर विश्वास करने वालों को छोड़कर ।

22 और यहां तक कि इस समय में भी, जब तुम्हें अपने लोगों को वह सीखाना चाहिए जिसे प्रभु तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें आज्ञा दी है, जबकि वे परमेश्वर की दृष्टि में केवल उन शब्दों के अनुसार निर्दोष नहीं ठहरते, जो मैंने तुम से कहे थे ।

23 और अब मैंने उन बातों को कह दिया जिन्हें कहने की आज्ञा प्रभु परमेश्वर ने मुझे दी थी ।

24 और प्रभु इस प्रकार कहता है: वे न्याय के दिन इन लोगों के विरुद्ध स्पष्ट गवाह के रूप में खड़े होंगे; इसलिए उनका न्याय किया जाएगा, हर एक मनुष्य का उसके कामों के अनुसार, चाहे वे भले हों, या वे बुरे ।

25 और यदि वे बुरे ठहरे तब उन्हें अपने अपराधों और घृणित कार्यों को स्वयं देखने का भंयकर दंड दिया जाएगा, जिससे वे प्रभु की उपस्थिति में संकोच करेंगे और दुर्गति और अंतहीन यातना सहेंगे, जहां तक उनके लिए वापस लौटना संभव नहीं; इसलिए उन्होंने अपनी आत्माओं को नरकदंड पिलाया हैं ।

26 इसलिए, उन्होंने परमेश्वर के क्रोध के प्याले से पिया है, जिससे कि न्याय से वे उसी प्रकार नहीं बच सकते जिस प्रकार आदम वर्जित फल खाकर पतन के न्याय से नहीं बच सका; इसलिए, वे कभी भी दया के पात्र नहीं बन सकते ।

27 और उनकी यातना ठीक उसी प्रकार होगी जैसे कि कभी न बुझने वाली आग और गंधक की झील, जिसका धुआं हमेशा हमेशा के लिए उठता रहता है । इस प्रकार प्रभु ने मुझे आज्ञा दी है । आमीन ।