पवित्रशास्त्र
सिद्धांत और अनुबंध 101


खंड 101

भविष्यवक्ता जोसफ स्मिथ को, कर्टलैंड, ओहायो में, 16 और 17 दिसंबर 1833 में, दिया गया प्रकटीकरण । इस समय संत जो मिसूरी में एकत्रित हुए थे बहुत अत्याचार सह रहे थे । उपद्रवी भीड़ ने उन्हें जैक्सन काउंटी में उनके घरों से भगा दिया था; और कुछ संतों ने स्वयं को वान बूरेन, लफाटी, और रे काउंटी में स्थापित करने का प्रयास किया था, लेकिन अत्याचार फिर भी होता रहा । संतों का मुख्य समूह उस समय क्ले काउंटी, मिसूरी में था । गिरजे के सदस्यों के विरूद्ध हत्या की धमकियां बहुत सी थी । जैक्सन काउंटी में संतों ने फर्नीचर, कपड़े, पालतू जानवरों, और अन्य निजि संपत्तियों को खो दिया था; और उनकी बहुत सी फसलें नष्ट कर दी गई थीं ।

1–8, संतों को उनके अपराधों के कारण दंड और कष्ट दिया जाता है; 9–15, प्रभु का प्रकोप राष्ट्रों पर होगा, लेकिन उसके लोगों को एकत्रित किया जाएगा और दिलासा दी जाएगी; 16–21, सिय्योन और इसके स्टेकों को स्थापित किया जाएगा; 22–31, सहस्राब्दी के दौरान जीवन के स्वभाव की व्याख्या की जाती है; 32–42, फिर संतों को आशीषित किया और प्रतिफल दिया जाएगा; 43–62, धनी पुरूष और जैतून के वृक्षों का दृष्टांत सिय्योन की कठिनाइयों और अंततः मुक्ति को दर्शाता है; 63–75, संतों को मिलकर एकत्रित होना जारी रखना है; 76–80, प्रभु ने संयुक्त राष्ट्र के संविधान को स्थापित किया था; 81–101, संतों को शिकायतों का निवारण, स्त्री और अधर्मी न्यायाधीक्ष के दृष्टांत के अनुसार करने का आग्रह करना है ।

1 मैं तुम से सच कहता हूं, तुम्हारे भाइयों के संबंध में जिन्हें कष्ट दिया गया है, और अत्याचार सहा है, और उनके पैतृक प्रदेश से बहिष्कृत कर दिया गया है—

2 मैं, प्रभु ने, उन पर कष्ट लाने की अनुमति दी है, जिस से वे पीड़ित हैं, उनके अपराधों के कारण;

3 फिर भी मैं उन्हें अपनाऊंगा, और वे तब मेरे हो जाएंगे जिस समय मैं अपने अभूषण एकत्रित करने आऊंगा ।

4 इसलिए, उन्हें दंड और परिक्षा की जरूरत है, अर्थात इब्राहिम के समान, जिसे अपने एकलौते की बलि देने का आदेश दिया गया था ।

5 क्योंकि वे सब जो दंड को सहन नहीं करेंगे, वरन मुझे अस्वीकार करते हैं, पवित्र नहीं किए जा सकते हैं ।

6 देखो, मैं तुम से कहता हूं, उनके मध्य कलह, और विवाद, और शत्रुता, और संघर्ष, और वासनामय और लोलुप इच्छाएं थी; इसलिए इन बातों के द्वारा उन्होंने अपनी पैतृक विरासत को दूषित किया था ।

7 वे प्रभु अपने परमेश्वर की वाणी पर ध्यान देने में धीमे थे; इसलिए, प्रभु उनका परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं पर ध्यान देने में धीमा था, उनकी कठिनाइयों के समय उत्तर देने में ।

8 अपने शांति के समय में उन्होंने मेरी सलाह को तुच्छ समझा; लेकिन, अपने कठिन समय में, जरूरत के कारण वे मुझे खोजते हैं ।

9 मैं तुम से सच कहता हूं, उनके पापों के होते हुए भी, उनके प्रति मेरे प्याले करूणा से भरे हैं । मैं पूर्णरूप से उनका बहिष्कार नहीं करूंगा; और क्रोध के समय मैं दया को याद रखूंगा ।

10 मैंने प्रतिज्ञा की है, और पूर्व आज्ञा के द्वारा आदेश दिया जाता है जिसे मैंने तुम्हें दिया है, कि अपने लोगों की ओर से मैं अपने रोष की तलवार गिरा डालूंगा; और जैसा मैंने कहा है, यह वैसा ही होगा ।

11 मेरा रोष सभी राष्ट्रों पर असीमित रूप भड़केगा; और यह मैं तब करूंगा जब उनके पापों का प्याला भर जाएगा ।

12 और उस समय वे सब जो प्रतिक्षा करते पाए जाते हैं, या अन्य शब्दों में, मेरा संपूर्ण इस्राएल, बचाया जाएगा ।

13 और वे जो बिखेरे गए हैं एकत्रित किए जाएंगे ।

14 और वे सब जिन्होंने शोक किया है दिलासा पाएंगे ।

15 और वे सब जिन्होंने मेरे नाम के कारण अपने जीवन दिए हैं उन्हें ताज पहनाया जाएगा ।

16 इसलिए, तुम्हारे हृदयों में सिय्योन के संबंध में दिलासा हो; क्योंकि सभी प्राणी मेरे नियंत्रण में हैं; ढाढस रखो और जानो कि मैं तुम्हारा परमेश्वर हूं ।

17 सिय्योन को इसके स्थान से हटाया नहीं जाएगा, बेशक उसके बच्चे बिखेर दिए जाते हैं ।

18 वे जो कायम रहते हैं, और हृदय में शुद्ध हैं, वापस लौटेंगे, और अपने पैतृक प्रदेश को आते हैं, वे और उनके बच्चे, अनंत आनंद के गीतों के साथ, सिय्योन के उजड़े स्थानों को फिर से बसाने के लिए—

19 और ये सब बातें इसलिए ताकि भविष्यवक्ताओं के वचन पूरे हों ।

20 और, देखो, कोई भी अन्य स्थान नियुक्त नहीं हुआ है सिवाय उसके जिसे मैंने नियुक्त किया है; न ही कोई अन्य स्थान नियुक्त किया जाएगा सिवाय उसके जिसे मैंने नियुक्त किया है, मेरे संतों को एकत्रित करने के कार्य के लिए—

21 सिवाय उस दिन के जब उनके लिए कोई स्थान न होगा; और तब मेरे पास अन्य स्थान हैं जो मैंने उनके लिए नियुक्त किए हैं, और वे स्टेक कहलाएंगे, सिय्योन के परदे या बल के लिए ।

22 देखो, यह मेरी इच्छा है, कि वे सब जो मेरे नाम को पुकारते हैं, और मेरे सुसमाचार के अनुसार मेरी आराधना करते हैं, पवित्र स्थानों में एकत्रित, और खड़े होने चाहिए;

23 और उस प्रकटीकरण के लिए तैयार हों जो आता है, जब मेरे मंदिर को ढकने वाला परदा, मेरे मंडप में, जो पृथ्वी को ढके रहता है, उठा लिया जाएगा, और सब लोग मिलकर मुझे देखेंगे ।

24 और प्रत्येक नश्वर वस्तु, मनुष्य, या मैदान के जानवर, या आकाश के पक्षी, या सागर की मछली, जो पृथ्वी पर निवास करते हैं, नष्ट कर दिए जाएंगे;

25 और वह तत्व भी अत्यधिक गरमी में पिघल जाएगा; और सब वस्तुएं नई बन जाएंगी, ताकि मेरा ज्ञान और महिमा संपूर्ण पृथ्वी पर निवास कर सके ।

26 और उस दिन में मनुष्य की शत्रुता, और जानवरों की शत्रुता, सभी प्राणी की शत्रुता, मेरे सामने से हटा दी जाएगी ।

27 और उस दिन में जो कुछ कोई मनुष्य मांगता, वह उसे दिया जाएगा ।

28 और उस दिन में शैतान के पास किसी मनुष्य को लालच देने की शक्ति नहीं होगी ।

29 और कोई दुख नहीं होगा क्योंकि कोई मृत्यु नहीं है ।

30 उस दिन में शिशु नहीं मरेंगे जब तक वह बूढ़ा नहीं होता; और उसका जीवन वृक्ष की आयु के समान होगा;

31 और जब वह मरता है वह सोयेगा नहीं, अर्थात पृथ्वी में, लेकिन पलक झपकते ही बदल जाएगा, और उठा लिया जाएगा, और उसका विश्राम आनंददायक होगा ।

32 हां, मैं तुम से सच कहता हूं, उस दिन में जब प्रभु आएगा, वह सब बातें प्रकट करेगा—

33 बातें जो हो चुकी हैं, और गुप्त बातें जिसे कोई मनुष्य नहीं जानता, पृथ्वी की बातें, जिसके द्वारा इसकी रचना हुई थी, और इसके उद्देश्य और प्रयोजन—

34 बातें अति मूल्यवान, बातें जो ऊपर हैं, और बातें जो नीचे हैं, बातें जो पृथ्वी में हैं, और पृथ्वी पर, और स्वर्ग में हैं ।

35 और वे सब जो मेरे नाम के लिए अत्याचार सहते, और विश्वास में कायम रहते हैं, यद्यपि उन्हें उनका जीवन बलिदान करने के लिए नियुक्त किया जाता है फिर वे इस संपूर्ण महिमा के भागीदार होंगे ।

36 इसलिए, भयभीत न हो मृत्यु से भी नहीं; क्योंकि इस संसार में तुम्हारा आनंद पूर्ण नहीं, लेकिन मुझ में तुम्हारा आनंद पूर्ण है ।

37 इसलिए, शरीर के लिए चिंता न करो, न ही शरीर के जीवन के लिए; लेकिन आत्मा के लिए चिंता करो, और आत्मा के जीवन के लिए ।

38 और हमेशा प्रभु के निकट रहने का प्रयास करो, ताकि धीरज से तुम अपनी आत्माओं को बचा सको, और तुम अनंत जीवन प्राप्त करो ।

39 जब मनुष्य मेरे अनंत सुसमाचार में नियुक्त किए जाते हैं, और अनंत अनुबंध में के साथ अनुबंधित होते हैं, वे पृथ्वी के नमक और मनुष्य के स्वाद के समान समझे जाते हैं;

40 वे मनुष्य के स्वाद होने के लिए नियुक्त किए जाते हैं; इसलिए, यदि पृथ्वी का नमक अपना स्वाद खो दे तो यह किस काम का सिवाय इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए ।

41 देखो, ज्ञान इसी में है सिय्योन के बच्चों के संबंध में, सब नहीं, लेकिन बहुत से; पाप में लिप्त पाए गए हैं, इसलिए उन्हें अवश्य ही दंड दिया जाना चाहिए—

42 वह जो स्वयं को बड़ा बनाएगा छोटा किया जाएगा, और वह जो स्वयं को छोटा करेगा बड़ा किया जाएगा ।

43 और अब, मैं तुम्हें एक दृष्टांत दिखाऊंगा, ताकि तुम सिय्योन के संबंध में मेरी इच्छा जान सको ।

44 एक धनी पुरूष के पास जमीन का टुकड़ा था, बहुत उत्तम; और उसने अपने सेवकों को बोला: तुम मेरे बगीचे में जाओ, अर्थात जमीन के उस बहुत उत्तम टुकड़े पर, और जैतून के बारह वृक्ष लगाओ;

45 और उनके चारों ओर पहरेदार नियुक्त कर दो, और एक मिनार बना दो, ताकि कोई जमीन के आस-पास नजर रख सके, मिनार पर पहरेदार बनकर, ताकि मेरे जैतून के वृक्ष तोड़े न जा सकें जब शत्रु नष्ट करने और अपने साथ फल ले जाने के लिए मेरे बगीचे में आएगा ।

46 अब, इस धनी पुरूष के सेवक गए और वैसा किया जैसे उनके स्वामी ने उन्हें आदेश दिया था, और जैतून के वृक्ष लगाए, और चारों ओर बाड़ बना दी, और पहरेदार नियुक्त कर दिए, और मिनार बनाना शुरू कर दिया ।

47 और जब वे उसकी बुनियाद रख रहे थे, वे आपस में बातें करने लगे: और मेरे स्वामी को इस मिनार की क्या आवश्यकता?

48 और बहुत समय तक सलाह करते रहे, आपस में बात करते हुए: मेरे स्वामी को इस मिनार की क्या आवश्यकता, क्योंकि अभी तो शांति का समय है?

49 क्या यह धन सराफों को नहीं दिया जाना चाहिए था? क्योंकि इन बातों की कोई आवश्यकता नहीं है ।

50 और जबकि वे एक दूसरे के साथ असहमत थे वे बहुत आलसी हो गए, और उन्होंने अपने स्वामी की आज्ञाओं पर ध्यान नहीं दिया ।

51 और शत्रु रात्रि में आया, और बाड़ तोड़ डाली; और धनी पुरूष के सेवक जाग गए और भयभीत हुए, और भाग गए; और शत्रु ने उनके निर्माणों को नष्ट कर दिया, और जैतून के वृक्षों को तोड़ डाला ।

52 अब, देखो, धनी पुरूष, बगीचे के स्वामी, ने अपने सेवकों को बुलवाया, और उन को कहा, क्यों! यह इतने बड़े नुकसान का कारण क्या है?

53 अवश्य ही तुमने वैसा नहीं किया जैसा मैंने तुम्हें आदेश दिया था, और—बगीचे में वृक्ष लगाओ और चारों ओर बाड़ बनाओ, और इसकी दिवारों पर पहरेदार खड़े करे—मिनार भी बनाओ, और मिनार पर पहरेदार खड़े करो, और मेरे बगीचे की रखवाली करो, और नींद में नहीं सोना, ताकि कहीं शत्रु तुम पर आक्रमण न कर दे?

54 और देखो, मिनार पर पहरेदार ने शत्रु को देख लिया होता जब वह दूर ही था; और तुम तैयार हो गए होते और शत्रु को इसकी बाड़ तोड़ने से रोक देते, और नष्ट करने वाले के हाथों से मेरे बगीचे को बचा लेते ।

55 और दाख के बगीचे के स्वामी ने अपने सेवकों में से एक से कहा: जाओ और मेरे बाकी सेवकों को एकत्रित करो, और मेरे घर के सभी लोगों को लो, जो मेरे सैनिक, मेरे जवान, और उन्हें भी जो मेरे सेवकों में मध्य आयु के हैं, जो कि मेरे घर लोग हैं, सिवाय उनके जिन्हें मैंने घर में रहने के लिए नियुक्त किया है;

56 और तुम तुरंत मेरे दाख के बगीचे की जमीन में जाओ, और मेरे बगीचे का सुधार करो; क्योंकि यह मेरा है; मैंने इसे पैसों से खरीदा है ।

57 इसलिए, तुम तुरंत मेरी जमीन में जाओ; मेरे शत्रुओं की दिवारें तोड़ डालो; उनकी मिनार को गिरा डालो, और उनके पहरेदारों को खदेड़ डालो ।

58 और जितना अधिक वे तुम्हारे विरूद्ध एकत्रित होते हैं, मेरे शत्रुओं से मेरा बदला लो, ताकि कुछ समय बाद मैं अपने घर के बाकी लोगों के साथ आऊं और जमीन पर कब्जा करूं ।

59 और सेवक ने अपने स्वामी से कहा: ये बातें कब होंगी?

60 और उसने अपने सेवक से कहा: जब मैं चाहूंगा; तुम तुरंत जाओ, और वे सब काम करो जिसका मैंने तुम्हें आदेश दिया है;

61 और मेरी यह मुहर और आशीष तुम पर होगी—मेरे घर के विश्वसनीय और बुद्धिमान भंडारी, मेरे राज्य का शासक ।

62 और उसका सेवक तुरंत गया, और वह सब किया जो उसके स्वामी ने उसे आदेश दिया था; और कई दिनों के बाद सब कुछ ठीक कर दिया गया ।

63 फिर, मैं तुम से सच कहता हूं, सब गिरजों के संबंध में मैं तुम्हें ज्ञान की बात दिखाऊंगा, जितना अधिक वे अपने उद्धार के लिए सही और उचित तरीके मार्गदर्शन पाना चाहते हैं—

64 ताकि मेरे संतों का एकत्रित होने का कार्य जारी रह सके, ताकि मैं उनका निर्माण कर सकूं मेरे नाम के लिए पवित्र स्थानों पर; क्योंकि फसल पकने का समय आ चुका है, और मेरा वचन अवश्य पूरा होना चाहिए ।

65 इसलिए, मुझे अपने लोगों को एकत्रित करना चाहिए, गेहूं और जंगली घास के दृष्टांत के अनुसार, ताकि गेहूं को खलिहानों में सुरक्षित रखा जा सके अनंत जीवन पाने, और सिलेस्टियल महिमा में ताज पहनाए जाने के लिए, जब मैं अपने पिता के राज्य मे आऊंगा प्रत्येक मनुष्य को उस अनुसार प्रतिफल देने जैसे उसके काम होंगे;

66 जब जंगली घास को गट्ठों में बांधा जाएगा, और उनके बंधन मजबूत किए जाएंगे, ताकि वे कभी न बुझने वाली आग में जलाए जाएं ।

67 इसलिए, एक आज्ञा मैं सभी गिरजों को देता हूं, कि वे एकत्रित होना जारी रखेंगे उन स्थानों पर जिसे मैंने नियुक्त किया है ।

68 फिर भी, जैसा मैंने तुम्हें एक पूर्व आदेश में कहा है, तुम्हारा एकत्रित होना शीघ्रता में न हो, और न ही भागने के द्वारा; लेकिन सभी बातों को तुम्हारे सम्मुख तैयार किया जाए ।

69 और ताकि सब बातें तुम्हारे सम्मुख तैयार हो सकें, उस आदेश का पालन करो जो मैंने तुम्हें इन बातों के संबंध में दी हैं—

70 जो कहता है, या सीखाता है, सारी जमीनों को पैसों से खरीदो, जो पैसों से खरीदी जा सकती है, उस क्षेत्र के आस-पास जिसे मैंने सिय्योन का प्रेदश होना नियुक्त किया है, मेरे संतों के एकत्रित होने की शुरूआत के लिए;

71 सारी जमीन जिसे जैक्सन काउंटी में खरीदा जा सकता है, और आस-पास की काउंटी में, और बाकी को मेरे हाथ मे छोड़ दो ।

72 अब, मैं तुम से सच कहता हूं, सब गिरजों को उनके सारे पैसों को एकत्रित करने दो; ये कार्य अपने समय में होने दो, लेकिन जल्द-बाजी में नहीं; और उन सब बातों को पाने का प्रयास करो जो तुम्हारे सम्मुख तैयार की जाती हैं ।

73 और ईमानदार पुरूषों को नियुक्त किया जाए, बुद्धिमान पुरुष भी, और उन्हें इन जमीनों को खरीदने भेजो ।

74 और पूर्वी देशों में गिरजे, जब वे बना लिए जाएं, यदि वे इस सलाह पर ध्यान देंगे तो वे जमीनों को खरीद सकते हैं और उन पर एकत्रित हो सकते हैं; और इस तरीके से वे सिय्योन स्थापित कर सकते हैं ।

75 अब पहले से ही पर्याप्त भंडार में है, हां, बहुतायत से भी, सिय्योन को प्राप्त करने के लिए, और उसके उजड़े प्रदेश को स्थापित करने के लिए, फिर से परास्त न किए जाने के लिए, यदि गिरजे, जो स्वयं को मेरे नाम द्वारा दर्शाते हैं, मेरी वाणी पर ध्यान देने की इच्छा करते हैं ।

76 और मैं तुम से फिर कहता हूं, जो शत्रुओं द्वारा बिखेरे गए हैं, यह मेरी इच्छा है कि उन्हें निवारण, और मुक्ति के लिए आग्रह करना जारी रखना चाहिए, उनके हाथों के द्वारा जो तुम्हारे ऊपर शासकों और अधिकारियों के रूप में रखे गए हैं—

77 लोगों की व्यवस्था और संविधान के अनुसार, जिसे मैंने स्थापित होने की अनुमति दी है, और सभी लोगों के अधिकार और सुरक्षा को कायम रखना चाहिए, न्याय और पवित्र नियमों के अनुसार ।

78 ताकि प्रत्येक मनुष्य भविष्य के संबंध में सिद्धांत और नियमों में कार्य कर सके, नैतिक स्वतंत्रता जो मैंने उसे दी है, कि प्रत्येक मनुष्य न्याय के दिन अपने स्वयं के पापों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सके ।

79 इसलिए, यह उचित नहीं है कि कोई मनुष्य एक दूसरे की दासता में हो ।

80 और इस उद्देश्य के लिए मैं इस प्रदेश के संविधान को स्थापित किया है, बुद्धिमान मनुष्यों के द्वारा जिन्हें मैंने इस उद्देश्य के लिए ऊपर उठाया, और लहू बहाने के द्वारा इस प्रदेश को मुक्त किया था ।

81 अब, सिय्योन के बच्चों की तुलना किस के साथ करूंगा? मैं उनकी तुलना दृष्टांत की स्त्री और अधर्मी न्यायाधीक्ष के रूप में करूंगा, क्योंकि मनुष्य को हमेशा प्रार्थना करनी चाहिए, जो इस प्रकार कहता—

82 एक शहर में एक न्यायधीक्ष था जो परमेश्वर से भय नहीं रखता, और न ही मनुष्य की चिंता करता था ।

83 और उस शहर में एक विधवा थी, और वह उसके पास आई, कहते हुए: मुझे मेरे शत्रु से बचा ले ।

84 और उसने कुछ समय तक ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में उसने अपने आप से कहा: यद्यपि मैं न तो परमेश्वर से भय रखता हूं, और न ही मनुष्यों की चिंता करता हूं, फिर भी क्योंकि यह विधवा मुझे सताती रहती है मैं इसका न्याय करूंगा, ताकि यह बार बार आकर मुझे तंग न करे ।

85 इस प्रकार मैं सिय्योन के बच्चों की तुलना करूंगा ।

86 उन्हें न्यायधीक्ष के पैरों पर आग्रह करने दे;

87 और यदि वह उन पर ध्यान नहीं देता है, उन्हें गवर्नर के पैरों पर आग्रह करने दो;

88 और यदि गवर्नर उन पर ध्यान नहीं देता है, उन्हें राष्ट्रपति के पैरों पर आग्रह करने दो;

89 और यदि राष्ट्रपति उन पर ध्यान नहीं देता है, तब प्रभु उठेगा और अपने छिपने के स्थान से बाहर आएगा, और उसके प्रकोप में राष्ट्र कष्ट सहेगा;

90 और उसकी झुंझलाहट में, और उसके क्रोध में, उसके समय में, उन दुष्ट, अविश्वासी, और अधर्मी भंडारियों को काट डालेगा, और उन्हें कपटियों, और अविश्वासियों के समान दंड देगा;

91 अर्थात बाहर के अंधकार में डाला जाएगा, जहां रोना, और चिल्लाना, और दांत का पीसना होगा ।

92 तुम प्रार्थना करो, इसलिए, कि उनके कान तुम्हारे चिल्लाने द्वारा खोले जाएं, ताकि मैं उन पर दया कर सकूं, कि ये बातें उनके साथ न हो ।

93 जो मैंने तुम से कहा है उसका होना अवश्य है, ताकि किसी मनुष्य के पास बहाना न हो;

94 ताकि बुद्धिमान मनुष्य और शासक उसे सुनें और जानें जिसे उन्होंने कभी सोचा नहीं है;

95 ताकि मैं अपना नियम जारी कर सकूं, मेरा अद्वितीय नियम, और अपने कार्य को कर सकूं, मेरा अद्वितीय कार्य, ताकि मनुष्य धर्मी और दुष्ट में अंतर पहचान सकें, तुम्हारा परमेश्वर कहता है ।

96 और फिर, मैं तुम से कहता हूं, यह मेरे आदेश और मेरी इच्छा के विरूद्ध है कि मेरा सेवक सिडनी गिलबर्ट मेरे भंडारगृह को बेचे, जिसे मैंने अपने लोगों पर नियुक्त किया है, मेरे शत्रुओं के हाथों में ।

97 जिसे मैंने नियुक्त किया है मेरे शत्रुओं के द्वारा भ्रष्ट होने दो, उनकी सहमति के द्वारा जो स्वयं को मेरे नाम का कहते हैं;

98 क्योंकि मेरे विरूद्ध यह बहुत ही कष्टदायक और दुखदायी पाप है, और मेरे लोगों के विरूद्ध, उन बातों के परिणामस्वरूप जिसकी मैंने घोषणा की है और राष्ट्रों पर शीघ्र होने को हैं ।

99 इसलिए, मेरी यह इच्छा है कि मेरे लोग दावा करें, और दावे पर कायम रहें उन पर जिन्हें मैंने उनके लिए नियुक्त किया है, यद्यपि उन्हें वहां रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी ।

100 फिर भी, मैं यह नहीं कहता कि उन्हें वहां नहीं रहना चाहिए; क्योंकि जितना अधिक वे प्रतिफल लाते और मेरे राज्य के योग्य कार्य करते हैं वे वहां रहेंगे ।

101 वे निर्माण करेंगे, और दूसरे इसमें नहीं बसेगें; वे दाख के बगीचे लगाएंगे, और वे उनके फल खाएंगे । तब भी । आमीन ।